Surya Chalisa

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

सूर्यचालीसा जो कोई गावै।
सोय भक्त अपराध न खावै।।

सोय भक्त अपराध न खावै।
कूद पद प्रगाध प्रनाम करावै।।

जब भी कोई गावै सोई।
प्रभाते उठ उठ सब काज सफल होई।।

दोहा:
जो सुर्य नारायण जी की।
सो ब्राह्मण स्वर्ग समान तीरथ स्थान धान की।।

सुर्य चालीसा की जोगिन्द्र कहावै।
दुष्ट संकट तें निवारै सब राह चावै।।

चलत ब्रह्मा जी मुनि नारद गाता।
सनक सनंदन जानकी नायक रावणहार।।

रघुबीर सहस्त्रार्जन प्रकाशा।
रावण मार्ग मग जानकी प्रकाशा।।

चारों युग प्रतिपालनहारा।
अतिसय भक्तन को उबारणहारा।।

स्तुति राजा काल करे चिताना।
जयति जयति हे शशि भगवान ज्योति शिवगुण गाना।।

काशी पुराण प्रगाध नृप सिंहासन धारी।
करत भानु सवारी शतरु हानि पुकारी।।

सोलह योजन स्वर्ग मार्ग पुथारी।
अष्टसिद्धि दस दिगपाल अति विचारी।।

सर्व दुःख ताप निवारणहारा।
मुख पर श्वेत सुर्य उजाला।।

अरुण पुरुषोत्तम गाता।
बहुत बिधि निर्मल जल चरण प्रकाता।।

कुंडल शुचि ग्रिवर गंगाधर श्यामा।
सुभ्रु भूषण अशेष बान धारी सामा।।

अजित वीर बहुमान निकारी।
सर्व दुष्ट बिचारी देह अधारी।।

पुरब दिग्द्वार गर्जनहारा।
धरत को विभीषण भय उच्छारा।।

पवन कुमार बलि वानर धारा।
करत भानु संवारी रवि जी कुंडल धारा।।

सब जग को ज्ञान दान धारी।
अरुण विजय कहे न तुम्ह बिचारी।।

प्रत्येक युग जाहिं पर धारी।
सुत मोहिं पाप दुष्ट पारी।।

कृपा करहु कारनीधि कारन।
हरहु दुःख भय सर्व भाव विधारन।।

जो कोई गावै श्री सूर्य चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

सूर्य चालीसा जो कोई गावै।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

इति श्री सूर्यपुत्र संजीवन सम्भार राम चालीसा सम्पूर्ण होत।।

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