Saraswati Chalisa

दोहा:
जय श्री सरस्वती माता, मैया जय श्री सरस्वती माता।
सदा विद्या बुद्धि दे, कर्म प्रवाह प्रचंड विधाता॥

चालीसा:
जय श्री सरस्वती माता, मैया जय श्री सरस्वती माता।
जय श्री सरस्वती माता, मैया जय श्री सरस्वती माता॥

मातु विद्या दान करो, विघ्न विनाशनी।
संकट हरो मंगल करो, जग का आनंददाता॥

जय श्री सरस्वती माता…

तुम भुवन में आयी, श्याम बसंत छवा।
जैसे सूर्य किरण मंडल, में होत भव्य लवा॥

जय श्री सरस्वती माता…

तुम हो प्राचीन काली, आध्या शक्ति माता।
विद्या सम्पत्ति करो, विनाश विघ्नहर्ता॥

जय श्री सरस्वती माता…

तुम भगवती संतान, सुन्दर बुद्धि धारी।
जैसे दीपक सुन्दर, विद्या दान अहंकारी॥

जय श्री सरस्वती माता…

वाणी शुद्ध सरस्वती, ज्ञान मंदिर तेरा।
जैसे धूप मधु में मिले, ग्यान की सीख विचारा॥

जय श्री सरस्वती माता…

मातृ संगति जो तुम्हारी, सुन्दर बालक प्यारे।
करत सब बच्चन की, अभिलाषा सिधारे॥

जय श्री सरस्वती माता…

श्री सरस्वती चालीसा, सर्व शुभ करत निवासा।
मातू विद्या दान करो, विघ्न विनाशनी।

जय श्री सरस्वती माता, मैया जय श्री सरस्वती माता।
सदा विद्या बुद्धि दे, कर्म प्रवाह प्रचंड विधाता॥

जय श्री सरस्वती माता, मैया जय श्री सरस्वती माता।
जय श्री सरस्वती माता, मैया जय श्री सरस्वती माता॥

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