दोहा:
जय साईंं, जय साईंं, जय जय साईंं।
सदगुरु साईंं महाराज, की जय जय साईंं॥

चालीसा:
जय साईंं जय साईंं, सदगुरु साईंं।
जय जय साईंं॥

जो कोई जापे साईंं का, हृदय से उसका नाम वहीं।
माला तुलसी वाणी, देवन जन मन राम समान वहीं॥

जय साईंं…

प्रेम भक्ति से जो जापे, साईंं का नाम वहीं।
मनवांछित फल पावे, साईंं रक्षक वहीं॥

जय साईंं…

जो कुण कीत वचन नियारे, साईंं व्रत उसका होत धारे।
कष्ट मिटत उसके जीवन से, श्रद्धा संग साईंं प्यारे॥

जय साईंं…

कोई भी आरती उतारे, साईंं के हृदय महां ध्यान धरे।
दरबार में जो ध्यान लगावे, श्रद्धा संग साईंं ध्यान धरे॥

जय साईंं…

साईंं की सदा जपत, श्रद्धा संग भजत सदा।
उनकी कृपा से मन समा जाये, साईंं रक्षक हमारा॥

जय साईंं, जय साईंं, जय जय साईंं।
सदगुरु साईंं महाराज, की जय जय साईंं॥

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