दोहा:
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

चालीसा:
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार॥

राम चरित मानस जाको, इज्ञान गुन सदार।
तुलसीदास सदा हृदय रघुनाथ की भाजो, श्रीरघुनाथ॥

रामचरित मानस पथ प्रबोधन, सुमिरौं पवन कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार॥

तुम संसार शक्ति लयकरि, रामधुन अनुरागी।
कामार्थ सेतु प्राण दान करि, सदा रघुपति के दासी॥

तुलसी जय जय जय राम, जै सज्जना की राम।
श्री रघुवर हृदय बिहारी, जय श्रीराम॥

जेहि जन्म द्रोह असुर सन्हारे, बामासुर मारि बिचारी।
भव भय हारी जननि सुता, हिय हरषी रघुनायकी॥

दीन दयाल राखहु जगदीश, भव भय भंजन गुन गायकी।
तुलसीदास बाल कौशल चन्द्रा, जय जय जय सीताराम॥

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