दोहा:
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सदा सदा मैं जीवत रहूं, तुमको नित सेवत रहूं॥

चालीसा:
जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता॥

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नरद ऋषि गाता॥

जय लक्ष्मी माता…

धूप दीप फल मेवा, माँ सेवत नर नारी।
सेवत नर नारी॥

तुम ही जग की माता, सुर्य चन्द्रमा ध्याता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

जय लक्ष्मी माता…

महालक्ष्मी जी को ध्यावत, विधि होत तजी धामा।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

जय लक्ष्मी माता…

संतति जननी सदा शुभकर्मी, करत सदा शुभकामा।
महालक्ष्मी जी को ध्यावत, विधि होत तजी धामा।

जय लक्ष्मी माता…

रिद्धि सिद्धि की धात्री तुम्हारी, अविनाशी धामा।
सेवत नर नारी॥

जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता॥

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सदा सदा मैं जीवत रहूं, तुमको नित सेवत रहूं॥

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