जय गायत्री माता, मैया जय गायत्री माता।
तुमको नित ध्याऊं, मैं जन्म-जन्म की भक्ति करूं॥

चालीसा पाठ करूं, तुमको मन से प्रिय धरूं।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश, तिन्हों तुमहीं ध्याऊं॥

ज्ञान देती है ज्ञान दाता, सब तीर्थों में तुम ही राजा।
ज्ञान से तुम नहीं कोई, तुम ही ज्ञान के सम्राटा॥

स्वर्ग-सुख की तुम सेवा, सबकी चिंता तुम ही हरी।
देवी तुम ही देवता, तुम ही भक्तों की प्यारी॥

जग में तुम ही सुन्दर, सुर मुनि जन यहाँ अधिकारी।
विद्या दान तुम करती, विश्व-रूपा तुम प्यारी॥

चारों युगों में तुम्ही, ज्ञान का दाता प्रिया।
तुम ही सच्ची सुखदात्री, दुखहर्ता तुम्ही हिया॥

गायत्री माता की चालीसा, जो कोई गावे।
मनवांछित फल पावे, सूर ब्रह्माजी बन जावे॥

गायत्री माता बलिहारी, तुम्हारे चरणों में सदा सुख धारी।
तुम ही ज्ञान के स्वामी, तुम ही हृदय के धामी॥

जय गायत्री माता, मैया जय गायत्री माता।
तुमको नित ध्याऊं, मैं जन्म-जन्म की भक्ति करूं॥

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