Durga Chalisa

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्रल्या करि विगाला॥

एतन बरनी करति भारी।
कैन मुख कर काली के दारी॥

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन सांचित कियो सारे॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ करि त्रास दयानी॥

पूरन प्रताप तुम्हारो जग माहि।
जगत उज्जारि यम करहु साहि॥

देवी चालीसा जो न गावे।
ता पार न पावे मातु जो यह सुनावै॥

जै अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥

जै अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर वीराजत टीको।
मृगमद को उदर में राजत।

कोटि छत्र धुले छवि नैना निकट नहिं आवत।
लम्बोदर जानकी सुख दाता॥

श्री भैरव दास तुम्हारा।
कीनो कुलखंडन कारना॥

एहि चालीसा अम्बा तुम्हारी।
जो कोई गावत है सब सुख भोग अरु धारी॥

जो कोई गावत सोई पुरणाना।
पाठ करावै तासु ही आना॥

तासु कीनो रावन हनना।
सुर लोक ही तुम्हार ध्याना॥

ध्यान लो ध्यान लो माँ मन में ध्यान।
जय जय श्री महाकाली महालक्ष्मी जय जय श्री महाकाली महालक्ष्मी॥

ध्यान लो ध्यान लो जपो माँ के नाम।
जय जय श्री महाकाली महालक्ष्मी जय जय श्री महाकाली महालक्ष्मी॥

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