Veerani Ki Katha

“वीरानी की कथा (Veerani Ki Katha)” एक प्रसिद्ध कथा है जो करवा चौथ पर्व के महत्व को बताती है। यह कथा राजस्थान में बहुत प्रसिद्ध है और यहां इस कथा की विस्तृत वर्णन की गई है:

बहुत समय पहले, राजस्थान के एक गांव में वीरानी नामक एक साहसी और पतिव्रता स्त्री रहती थी। उसके पति का नाम वीरमल था, जो एक समर्थ व्यापारी था। वीरानी और वीरमल एक-दूसरे से प्यार करते थे और उनके बिच स्नेह और विश्वास बहुत गहन था।

एक दिन, वीरानी ने अपने पति के साथ व्रत रखने का निश्चय किया, जिसका उद्देश्य उनके पति की लंबी आयु और भाग्य की भलाई के लिए प्रार्थना करना था। वीरानी ने कहा, “मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि मेरे पति की आयु बढ़े और हम सदा सुख-शांति में रहें।”

करवा चौथ के दिन, वीरानी ने सुबह से ही उपवास का आरंभ किया और दिन भर भगवान की पूजा, व्रत कथा के सुनाने और चंद्रमा की देखभाल की। उन्होंने श्रद्धा भाव से व्रत किया और अपने पति की लंबी आयु की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की।

शाम को, जब चाँद दिखाई दिया, वीरानी ने अपने पति की पूजा की और भगवान से उनके पति की लंबी आयु की कामना की। उनकी प्रार्थना और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उनके पति को लंबी आयु प्रदान की।

इस प्रकार, वीरमल को लंबी आयु मिली और उनका जीवन सुखमय बन गया। वीरानी और वीरमल की प्रेम भरी जीवन यात्रा ने उनके बीच विश्वास, समर्थन और स्नेह का महत्व दिखाया। यह कथा विवाहित जीवन के महत्व को बताती है और करवा चौथ के पर्व का महत्व उजागर करती है।

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